• megs0808 15w

    मगरूर तो नहीं , हाँ मसरूफ़ ज़रूर हूं जिंदगी की उलझनों में आजकल
    यूं चुप रहकर खामोशियों के सिलसिले आप ना बढाइये,
    सुलझाने की कोशिश में हूँ कुछ गिरहों को मैं इन दिनों,
    ज़रा सुनिए, मेरी हर ख़ता को गुज़रते वक्त की लौटती लहरों में छोडकर ये शिकवे शिकायत अब भूल भी जाइए ।
    ©megs0808