• hrishavdeovardaan 5w

    तुम नजर आती हो

    उलझा सा हूँ

    एक राह प्रियतम को जाती है ,एक राह
    जो जानता हूं समेट लेगी मुझे
    मेरे अंदर के प्रेम को गुलजार कर दे
    मुझे सांचे में डालने वाली , रंगों को परखने वाली ,
    कविताओं से संगीत से लिप्त
    कलाओं से आकर्षित ,
    जीवन का वह साथ ,जहां प्रेम रंग पकड़ने लगता है
    कौतुकता नहीं होती
    बस, सब में तुम नजर आती हो |

    दूजी जो राह है
    प्रियतम के यादों पर जीने की राह,
    जीने की - मरने की ,अंदर से बाहर तक
    सब छिंटों में रंगों की भात्ति, प्रेम को उड़ेल देगी
    बिखेरकर
    प्रियतम से प्रेरित , प्रेम से प्रेरित
    प्रियतम के प्रेम से प्रेरित
    जितनी कुंठा उतने ही स्वर बिखेरेगी
    यादों की बिरहा में जलते बुझते सब दिए
    कभी सागर की बेरुखी लहरों से उफ़नाती
    स्वर्ग -नरक सबसे झूलती हुई ,यह भी कोई जीना है
    पर सच कहूं तो , यह रंग भी तुम से ही जुड़े हैं
    पहले वाले रिश्ते की तरह गहरे हैं और शायद
    साथ वाले रंग से थोड़े गहरे
    यह सलीका है जिंदगी का , कुछ लेकर कुछ देने का
    लेकिन तुम्हें क्या मिला बदले में ??
    एक बात और तुम सब में नजर आती हो |

    ©hrishavdeovardaan