• sifarnamaa 13w

    तुम्हारी हसरत ए जानेजाना, की कोई सहरा से आब माँगे...
    अजब दीवानें, तेरे दीवानें, तुझीसे तेरा ज़वाब माँगें...

    तेरी वफ़ाएँ, की जैसे बदली, घड़ी को ठहरे, घड़ी में जाएँ..
    तके हैं माज़ी को दिल की अँखियाँ,पुरानी रातों के ख़ाब माँगें...

    ज़हन तराज़ू उठा के तोले, तुम्हारे वादे, निबाह उनके...
    तुम्हारी बतियाँ, तुम्हारी क़समें, न जानें क्या-क्या हिसाब माँगें..

    कहीं, किसी एक गहरी वादी, में बुझते दिल के चिनार सारे...
    पहाड़ की चोटियों को ताके, और अपनी-अपनी चिनाब माँगे...

    तुम्हारी अँखियों की जिन को लत है, जो तेरी ख़ातिर लुटे हुए हैं...
    ए मेरे साक़ी, वो मयख्वारां, तेरी नज़र की शराब माँगे...

    सुरेन्द्र..