• hcompany007 14w

    माँ

    माँ नूर हो तुम एक,
    खुदा के बनाए, उन नयाब हूरो से परे।
    तुम एक अचल और अडिग स्तंभ हो,
    दिक्सूचक सा, मेरे जैसे काफिरो के लिए।
    मैं एक आवारा मुसाफिर हूँ रेगिस्तान का,
    माँ,तुम रोशनी हो,किनारा हो,
    उस रेगिस्तान का।
    -- harshit agrel namdev