• __nk__ 7w

    बहुत दिनों से सुन पड़ा है ये बादलों का मकान,
    शायद इस घर में भी अब जाले पड़ गए।

    वो बुज़ुर्ग क्या गया दुनिया छोड़कर,
    रिवायतों के जैसे ताले पड़ गए।

    ज़रा निकला ही था धूप में सफ़र के लिए,
    एक कदम रखा कि पैरों में छाले पड़ गए।

    वो गाँव की रोटी छोड़ कर आया था शहर,
    यहाँ अब उसके खाने के लाले पड़ गए।
    ©__nk__