• pragatisheel_sadhak_bihari 14w

    वायदे!

    अब चोंचले वायदों से........................मुझे बेहद डर सा लगता है
    कब घोंसले उजड़ जाए...................मन शशंकित नर सा डरता है

    मानो किसी ने बीड़ा है उठाया...........खुशियों का रास्ता रोकने को
    जब तब विचलित हो जाता..........तब मन उजाड़ घर सा लगता है

    शुक्र है की काया सही सलामत....जब माया ने मचाई ग़जब आफत
    विस्मय होता बस उपहास पे........पर इरादे नहीं जर्जर सा लगता है

    सात फेरी,सात कसमें लिखा है लेना...........पति पत्नी के संबंध में
    तभी बाकी रिश्तों में..................वो बात नहीं, अमर सा लगता है

    हमने रियायतें दे रखी हैं गैरों को............खुद पे जुल्म कर जाने को
    कवायदें की नहीं वहाँ.......जहाँ बेगम की खुशियाँ बेघर सा रहता है

    पुष्प अर्पण लिये कसमें..................संग साथ जीने और मरने को
    फिर उनकी चाहतों के बिन दौड़े......ज़िन्दगी तर ब तर सा लगता है

    किसी ने तभी कहा कि 'साधक' अनाप शनाप... कुछ भी लिखता है
    'खुदा'वो नादां लड़का अभी अपने माँ के आंचल में डर सा पलता है