• the_kaur_writings 27w

    किस्से पुराने हो या नये,
    कस्सेदार तो वो ही है।
    इल्ज़ाम पुराने हो या नये,
    गुनाहगार तो हम ही है।
    वक्त आज का हो या गुज़रे कल का,
    ज़ख्म तो वहीं का वहीं है।
    अफ़साने इश्क के हो या नज़ारे मौत के,
    नज़रे तो वो ही है।

    गुस्ताखी की हमने एक दफा,
    खुद को आईने मे जो देख लिया
    कमबख्त आईना भी बोल पड़ा।
    "ना वो किस्से बदले, ना वो इल्ज़ाम।
    ना बदले अफसाने, ना किस्से और
    अफसाने सुनाने वाले बदले।
    बदला तो सिर्फ वक्त बदला,
    ना उनका कोई पैगाम आया,
    ना तेरी आँखो का इंतजार बदला।"

    ©the_kaur_writings