• drkrishnanikunj 9w

    सोचता था...

    सोचता था की तुम्हारे संग बिताए लम्हें हमेशा खुशी देंगें, गम में थोड़े आँसू भी छलका देंगें।
    पर यार कुछ यूं हुआ की अब याद आती तो है लेकिन दुख होता है उन लम्हों पर।
    बिछड़ना तो था ही एक रोज़ हमें,पर इस कदर नहीं कि अपनी मोहब्बत पर नफरत आजाये।
    तुम्हारा जाना मुझे मालूम था जाओगी एक दिन,पर यू बदल जाओगी की,अपनी चाहत पर लानत आजाये।
    क्या पाओगी तुम एक नई दुनियां, कुछ नई सौगात,पर बताना मेरे सीने पर रख कर सर सोते हुए जो धक धक की आवाजें आती थी,उन्हें किसके सीने में सुनोगी?
    धक धक करता है कुछ सीने में आज भी,मानो कोई दरवाज़ा ठोक रहा हो,सीना फाड़कर आने को...

    सोचता था में तुम्हारे संग बिताए लम्हे हमेशा खुशी देंगे.....
    Dr.शेखावत।।
    ©drkrishnanikunj