• nitikavats 23w

    हैवानियत में चुर आज, कल तक रिश्तों का गाते जो राग थे...
    दामिनी, निर्भया उनकी प्यास बुझाने का नाम थे...

    बेदर्दी की दर्दनाक घटनाएं सामने आ रही,
    जिस्म की भूख रूह को नोच-नोच कर खा रही...

    सड़कों पर उतरी भिड़ दिन दो दिन की कहानी है,
    सत्ता के फेर में फिर उठी गूंज गुम हो जानी है...

    फिर सभा में चीर हरण होगा, क्या आंखो में फिर चिंगारी दहकेगी?
    8 साल के जिस्म की खूशबू फिर दरिंदों में महकेगी...

    फिर मासूम एक चरित्र पर बदनामी का दाग उछालेंगे,
    फिर बुज़दिल माथे पर अपने भ्रूण हत्या का कलंक सजा लेंगे...

    - नितिका वत्स

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    हर रोज की कहानी..✍️

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