• kdwrites 5w

    तुम बात करते हो मेरे "मैं" की,
    मैं तो बीते कई सालों से "हम" ही था,
    ये तो तुम ही थे जो हमेशा,
    "मेरा" मन नहीं,
    "मुझे" ये नहीं चाहिए,
    "मेरा" मूड नहीं,
    "मुझे" जाना नहीं,
    "मुझे" नहीं अच्छा लगता,
    "मुझे" नहीं मिलना,
    "मेरा" कॉलेज,
    "मेरा" काम,
    "मेरा" ये, "मेरा" वो, हर चीज़ में बस बीते 5 साल में,
    तुमने अपने सिवा कुछ देखा ही कहाँ,
    इतनी मोहब्बत के बावजूद तुम्हे "हम" कभी दिखे ही नहीं,
    कभी ये तो ना पूछा, की "तुम्हारा" क्या मन?
    "तुम्हे" क्या चाहिए,
    सोचते भी तो क्यों,
    तुम्हारी सोच भी तो बस
    "तुम" पर शुरू और "तुम" पर खत्म..
    और आज जब छोड़ चुके हो मुझे
    तो अब मैं खुद के लिए कुछ बोल भी दूँ,
    तो क्यों तुमसे बर्दाश्त होता नहीं ?

    क्यों?
    तुमने छोड़ा ना बीच रास्ते मे मूझे,
    फिर आज कहाँ से "हम" की उम्मीद करते हो तुम,
    तुम तो पहले भी "हम" के काबिल न थे,
    बड़े आये ये कहने वाले
    की तुम "मैं-मैं" करते हो..
    ये हुनर तुम्हारा है,
    तुमसे हमने ये सीखा है,
    और आज 6 साल बाद ये हुनर आजमा रहे है
    तो तुम्हे चुभ रहा है,
    कहते है ना,
    दर्द तुम जो देते हो,
    खुद तभी जान पाते हो,
    जब होता है वो तुम्हारे साथ।।

    और अभी तो बस एक कदम रखा है,
    तुम्हारे नक्शे कदम पर,
    एक पल भी न बर्दाश्त हुआ ना,
    नहीं होगा,
    ये तो हम थे जो 6 साल,
    मुस्कुरा कर हर बात टालते रहे,
    वरना कोई और होता तो पता लगता
    की "मैं" क्या होता है और "हम" क्या ?
    ©kdwrites

    Read More

    मैं और बस मैं

    तुम बात करते हो मेरे "मैं" की,
    मैं तो बीते कई सालों से "हम" ही था,

    Read Caption.....