• i_m_arora82 15w

    जिंदगी

    खुश रहो उस अहसान से तुम जो खुदा ने तुम्हे ये जिंदगी बक्शी है। इंसान बनाया है। तुम्हे इंसानियत की रहमत बक्शी है। खुश रहो खुश रहने दो ये चार दिन की मस्ती है। उसके खेल के आगे तेरी नही कुछ चलती है। तू कठपुतली है हाथो के उसकी, माटी की तेरी कायाँ है। अंत समय कुछ नही जाना सब उसकी दी मोह माया है। गरूर न कर किसी बात का बंदे, ये सब कुछ एक दिखावा है। तेरा अपना कोई नही है ये खेल सब उसने रचाया है। वो एक सत्य इस जहांन का उसने ये संसार बनाया है।

    ©i_m_arora82