• monikakapur 7w

    प्रेम प्रेम सब कोऊ कहत, प्रेम न जानत कोई ,
    जो जन जाने प्रेम तो , मरे जगत क्यूँ रोई ।

    दीपक जो जग जानिए , लौ अंधकार मिटाए ,
    जले जो आपहुँ आग में , जग रोशन कर जाए

    प्रेम रतन अनमोल है , धन विपरीत सुभाओ,
    जितना लुटे , अधिक मिले , अर्जित करते जाओ ।

    बन बन ढूँढत है जिसे , लेकर तु इकतार ,
    मन में ही विचरे तेरे , तक तो मन इक बार ।

    पर निंदा में व्यर्थ किया , समय अमोल , वाचाल
    आपन दोष में आँखों पर परदा लिया था डाल।

    ढाई आखर प्रेम में , सब संसार समाय,
    प्रेम बिना निष्फल तेरी , पूजा, पुण्य , उपाय


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