• vivekpandey 7w

    दूसरों से तो छोड़ो खुद की किस्मत से अपनी जंग है,
    ये बला जिसे इश्क़ कहते हैं, इसमें अपना हाथ थोड़ा तंग है
    मुझे पता है इश्क़ सच्चा है,
    मेरा भी, तेरा भी,
    पर मिलना नसीब में नहीं है हमारे
    गर मिले कभी तो बस पहचान लेना तुम
    मिलने की खुशी का पता नहीं
    बिछड़ने का ग़म कम होगा
    हम ये मान लेंगे की
    हमारे मिलने के पल को किस्मत ने किस्तों में बांट रखा है
    हम ये मान लेंगे की
    हमारे खुशियों के पल को नियति ने हिस्सों में बांट रखा है
    तो क्या हुआ उन्हीं टुकड़ों से एक किस्सा बना लेंगे
    और तन्हाई में वही किस्सा खुद को सुना लेंगें

    ©vivekpandey | 77curves