• wordsinveins 10w

    ग़ालिब सा इश्क़ की हूँ मैं
    मुझे कुछ दिन और झेल ले ।
    मुझे रोना भी खूब आता है
    इन आंसुओ को कुछ दिन और झेल ले।
    मैं लाख कह दूँ , कि नहीं होता कुछ तेरे चले जाने से ,
    मेरे झूठ को तू कुछ दिन और झेल ले।
    मैं रात आधी में तुझे जो रुला दी ,
    जैसा भी हो बीच हमारे ,
    सुबह तू जगा कर देख लेना,
    मुझे कुछ वक़्त और झेल लेना ।
    मुझे खबर सब है , मुझे ये भी मालूम है कि तुझे कितना इश्क़ है मुझसे,
    मगर काबिल मैं नहीं, कुछ देर कोई झेल ले इसके।
    जो ना आँख खोलूं मैं कल को ,
    घबराना नहीं, काफिले में मुझे कुछ वक़्त और झेल लेना।
    मुझे कुछ कुछ करके इश्क़ देना ,
    पुरे के तो काबिल नहीं मैं।

    Navjyot kaur