• drinsaf 16w

    स्कूल की यादें

    वह स्कूल की यादें , सुन कर अच्छा लगा. क्योंकि बचपन के दिन याद करते हें तब चेहरे पर मुस्कुराहट होती. वो पहला स्कूल का दिन जब ना किसी को जानते थे ना ही पहचानते थे. उस दिन हुई सब से मुलाकात और थोड़े दिन में ही चालू हुई यारों से बात, धीरे धीरे इतने खास हुए पहले टेस्ट में यारों की नकल से पास हुए,वो दोस्तों का टेबल पर ढोल बजाना सर के आने पर डांट खाना, दोस्तों के टिप्प्न से खाना चुराना उसके गुस्सा होने पर मुह फुलाना, सर के प्रश्न के जवाब ना आने पर पीछे से बताना और गुस्सा आने पर दोस्त को पीटाना, दोस्ती हुई इतनी गहरी फिर आई एक्जाम की बारी, एग्जाम दिए ईश्वर के भरोसे पास हुए भी तो ईश्वर के भरोसे, जब दोस्तों से अलविदा कहने की बारी आई तो आँखे भी भर आई, दोस्तों से अलविदा किया पर दिल में सदा याद पाई....
    -इंसाफ अली