• karnpalash 37w

    माना कि पास नहीं हो तुम,
    फिर भी बहुत खास हो तुम।

    माना कि किसी और से मुहब्बत करती हो तुम,
    फिर भी बहुत खास हो तुम।

    माना कि मुझे खुद के ख्वाब से जगाती हो तुम,
    फिर भी बहुत खास हो तुम।

    माना कि खुद के आंसू बहा मुझे रुलाती हो तुम,
    फिर भी बहुत खास हो तुम।

    माना कि मुझे तुमसे मुहब्बत करने का हक नही,
    फिर भी बहुत खास हो तुम।

    माना कि काफी लम्बे समय तक बात नहीं करती हो तुम,
    फिर भी बहुत खास हो तुम।

    तेरी एक पल की हंसी मेरे सारे ग़म भूला देती है,
    इस लिए बहुत खास हो तुम।
    © पलाश कर्ण