• jaydaksh 13w

    मां

    आज बड़े दिन हुए आँख फिर से भर आई है,
    मेरी माँ मुझे बड़ी शिद्दत से याद आयी है ,
    यूं तो भूलता नहीं उसे मैं किसी भी हालात में,
    पर ना जाने क्यूं आज यादों की बदली छाई है,

    मुझसे तुझे छीनने की जुर्रत जो करे,
    उस खुदा की क्या शामत आई है,
    तेरी नजर हो मेहरबान तो कोई सितम कुछ नहीं,
    जो रुसवा हो ये सारा जहां तो गम नहीं,
    सारे जहां की दौलत तेरे क़दमों में निसार दूं,
    मौत भी आए नज़दीक तो उसे भी मार दूं,

    मैं मामूली हूं ये जानता हूं मैं,
    मेरी मां जो है तो मामूली नहीं हूं,
    ऐसा मानता हूं मैं,
    जन्नत को छोड़ तेरे पैरों में रहूं,
    फिर बच्चा बनूं तेरे आंचल सहूं,
    मेरे खुदा इतनी इल्तज़ा है मेरी,
    मैं फरिश्ता ना बनूं मां की गोदी में चलूं,

    ' जय ' ज़िन्दगी के दुखों को मौत आ जाएगी,
    तुम मां से मिलो, तबियत संवर जाएगी।


    ©jaydaksh