• anjusuryavanshi 14w

    आँखो मे रहा ,दिल मे उतर कर नही देखा
    कसती मे मुसाफिर ने समन्दर नही देखा
    यारो की मुहब्बत का यकीन कर लिया हमने
    फूलो मे छुपाया हुआ खंजर नही देखा
    महबूब का घर बुजुर्गो की जमी
    जो दूर गया उसने मूड कर पीछे नही देखा
    ©anjusuryavanshi