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    प्रेम खत

    कहना चाह भी रहा हूं और नही भी,
    जी भी रहा हूं ये पल और नही भी।

    ईन चीजो का अनुभव कम है मेरा,
    इसलिए सब दो चार पंक्तियों में हु कहरा।

    होना नही कुछ ये भी पता है,
    लेकिन फिर भी ईस जुबां पे तेरा ही नाम रटा है।

    तेरी नज़रों में मेरी कोई कदर नही।
    लेकिन मुझे भी उस दिन का सबर नही।।
    जिस दिन शायद तू वही सोचें जो मै सोचता हुं आज,
    लेकिन थमा हुआ है मेरा मन समय नही।

    लेकिन अगर तू खुश हैं ऐसे ही,
    तो मैं भी सम्भाल लूंगा खुदको जैसे तेसे ही।

    देखे तो सपने बहुत थे,
    लेकिन एक हाथ से नही बजती ताली।
    इसलिए तोड रहा हुं अपने प्यार की डाली।।

    फिर भी मिलूंगा हमेशा खड़ा तेरे साथ,
    जब भी हो कोई मुसीबत की बात।
    ©prsb_23