• raghav_mundra 15w

    4th post #hindipoems #writer #हकीकत से वाकिफ..

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    हकीकत से.....

    हकीकत से वाकिफ हैं ये दिल, ना जाने क्यों अनजान बन रहा हैं
    जिन्दा शरीर हैं फिर भी, ना जाने क्यों बेजान बन रहा हैं
    चारों और लोगो की आवाज हैं, सुना अनसुना मेरा हर कान लग रहा हैं
    खड़ा हूँ भीड़ में फिर भी, हर तरफ क्यों शमशान लग रहा हैं
    हर शक्ल जो देखी पहले, जाने क्यों अजीब पहचान बन रहा हैं
    क्या हारा क्या जीता हैं पता नहीं, निशाने से चूका तीर का कमान लग रहा हैं
    बैठा करता था यादे लेके जिस बागान में, वो भी अब बंजर खदान लग रहा हैं
    चेहरे पे कोई रंगत नहीं हैं, आँगन में बिखरा सामन लग रहा हैं
    कहाँ जा रहा हूँ खुद को पता नहीं, मेरा दिल खुद से हैरान लग रहा हैं
    ©raghav_mundra