• mrigtrishna 5w

    वक़्त बदला, मिज़ाज़ बदले,
    बदलते वक्त ने ख्यालात बदले,
    मेरी आँखों के हसीं ख्वाब,
    तेरी आंखों के राज बदले।
    कुछ अनकही सी रही बातें,
    तेरे कहने के अंदाज़ बदले।
    सनम बदला,ख़ुदा बदला,
    जो काफ़िर ने धर्म बदला।
    तेरी उल्फ़त करम बदला,
    तो चाहत ने हरम बदला,
    कुछ शौक से वो बदला
    कुछ शोक में, मैं बदला।
    बेहतर होगा अब पूरे बदल जाए,
    भूलके हर शिक़वा दोनों घर जाए।

    ©mrigtrishna