• nehulatagarg 7w

    क्रैथैसियन कहने लगते है - आप जो कह रहीं है वो सब सही है लेकिन इंसान अकेले कुछ नहीं कर सकता और उनका मुकाबला करना नामुमकिन है और हम अकेले कर भी क्या सकते है ? तो आहन्ना कहने लगती है - इंसान दुनिया में अकेला होता है और अकेले ही उसे अपनी राह बनानी पडती है । जिन्होंने भी इस दुनिया को बदला वो सब अकेले थे साथ उनके कोई भी नहीं था और कारवां लेकर कोई भी इस दुनिया में नहीं चला बल्कि कारवां तो उसके बाद बना है । जहाँ तक नामुमकिन होने की बात है तो दुनिया में मुमकिन तो कभी कुछ भी नहीं रहा जिसने भी कोशिश की मुमकिन उसी से हुआ है । यह दुनिया भी नामुमकिन ही लगी थी जिसने भी इसे देखा था लेकिन जिसने भी उसे मुमकिन करने के बारे में ठाना उसी ने जिंदगी में सबकुछ पाया है इसीलिये नामुमकिन तो इस दुनिया में कुछ भी नहीं । हमारे बाबा हमेशा कहा करते थे - इस दुनिया में तीन तरह की सोच वाले लोग होते है एक वो जो हमेशा अच्छाई को जीते है फिर चाहें कितनी ही तकलीफों से क्यों ना गुजरना पडें फिर चाहें जज्बातो़ की टूटन का सामना भी क्यों ना करना पडें फिर भी वो अपनी अच्छाई को वो नहीं छोडते बल्कि उस पर हमेशा बनें रहते है । दूसरी तरह के वो लोग होते है जो सिर्फ़ बुराई को जीते है और तीसरी तरह के वो लोग होते है जो अपनी कोई सोच रखते ही नहीं है अब आपको फैसला करना है की , आप कौनसी सोच वाले है । एक बात हमेशा हमारी याद रखिएगा की , दुनिया में हर इंसान को इम्तेहानों से गुजरना ही पडता है और यह उस पर है की , वो उन इम्तेहानों से गुजरकर क्या बनेंगा एक अच्छाई की दौलत रखने वाला या बुराई की तरफ मुड जाने वाला या उन तीसरे तरह के लोगों की तरह जो सिर्फ़ आँसू बहाना जानते है उन आँसूओं को लाने वाले की आँखों में आँखे डालकर उनका सामना करना । आप ख्वाब देखते है तो उसे सच करने के लिये मेहनत

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    चित्रांगना

    मशक्कत करनी ही पडती है और वो वहाँ भी आपको करनी होगी तो फिर जो मेहनत आ वहाँ कर सकते है वो यहाँ क्यों नहीं ? आहन्ना की बातों का कुछ तो असर होने लगा था क्रैथैसियन पर लेकिन अभी भी वो हिम्मत नहीं जुटा पा रहें थे और कशमकश में घिरे थे । इब्राहम अबु और रूखसार भारत पहुंच चुके थे और दक्षिणापथ में प्रवेश भी कर चुके थे । खेमें में रूखसार और इब्राहम अबु बात करने में लगे हुए थे की , एक खाविन्द आकर उन्हें बताने लगते है की , उन्होंने सब पता कर लिया है और यह कहकर चलें जाते है । रूखसार अबु से पूछने लगती है - अब क्या करना है ? कहाँ से शुरूआत करनी है अब तो अबु कहने लगते है - जिस घर में बेटी को दिया जाता है उस घर के लोगों के बारे में और उनके माहौल के बारे में जाना जाता है और यह बात उसके आस - पास रहने वाले उनके मिलने वाले और रिश्तेदारों से