• rahulmukherjee 7w

    कयामत

    सारे इत्रों की खुशबू,
    आज मन्द पड़ गयी।
    मिट्टी में बारिश की बूंदे,
    जो चन्द पड़ गयी।
    कल तक उड़ती थी चेहरे पर,
    आज पैरों से लिपट गयी।
    चन्द बूँदें क्या बरसीं बरसात की,
    धूल की फ़ितरत ही बदल गयी।

    - राहुल