• annie_merikalamse_ 14w

    एक छोटी सी कोशिश ������collaboration with��✍ @arunbhardwaj (atirek)

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    काहे बदल रही हो राहे बार-बार
    ठहर जाती है नज़रे गंगा के उस पार

    मै हूँ किनारे,ऐ दिल "जीत" हारे
    कभी हारो ज़रा ऐ बनारस के प्यार

    वो अजमेर था,जो शराफ़त भरा
    उसे लखनऊ बुलाये,नवाबो के द्वार

    @Arunbhardwaj (atirek)

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    बदल रही हूँ,राहे अपनी ये,सोच- सोच हर बार..
    के बनालु प्यार का आशियाना गंगा के उस पार.

    मेरे यार तुम्हे किनारे पर इंतज़ार न करने पड़े हर बार..
    गंगा के उस पार जब होगा प्यार भरा संसार..

    रही प्यार बनारस की ,इसकी बात ही है कुछ और
    इसकी शान के आगे,अजमेर,लखनऊ सब लागे एक ओर

    घाट अस्सी की वो बात निराली..
    गंगा आरती की वो थाली
    गलियो का वो शोर
    यार बनारस की,बात ही है कुछ और

    अजमेर का वो शराफत हो,या लखनऊ का नवाब
    हो शहंशाह या फ़क़ीर ,खो कर दृश्य में आजाये इसके द्वार
    ©_annie_