• mh_paakhi 6w

    तेरा होना कुछ खास तो नही था अब,
    मगर एक एहसास था मुझमें तेरे होने का,
    तुझे खुद से जुदा क्या किया,
    तु सारे एहसास ही ले गया,
    जो जीत अपनी लगती थी,
    वो सौदा घाटे का हो गया,
    जी लूगी यूही बीन एहसास के,
    पर ना चाहुगीं तू कभी लौट आए,
    और मेरी ही पहचान को मुझसे चुरा ले जाए,
    मेरा 'मैं' होना इन एहसासों से ज्यादा खास है,
    मेरा 'मैं' होना ही मेरे वजूद की पहचान है।

    ©mh_paakhi