• surajsharma 23w

    बारिश की इन बूंदों की तरह,
    आके तू चूम ले मुझे।
    पूर्वाइ इन हवाओं की तरह,
    अपनी ओर तू खींच ले मुझे।
    डुब जाने दे तेरी झील सी आंखों में,
    जी लेने दे वो पल दोबारा।

    बेहती हुई इन नदियों की तरह,
    दूर कहीं तू लेके चल मुझे।
    कोयल की मीठी बोली की तरह,
    गीत कोई तू सुना दे अब मुझे।
    थाम ले मुझको अपनी बांहों में,
    जी लेने दे वो पल दोबारा।


    कहां दूंदू में तूझको तू बता,
    हर तरफ हैं बस तेरा ही शाया।
    किससे पूछूं में तेरा पता,
    मदहोश हैं सब तेरी ही यादो में।
    अब तो लगता हैं जैसे हो गया हूं,
    मैं लापता,‌कहीं दूर . . . . लापता ।
    ©surajsharma