• rishav_sharma 22w

    आसीफा

    फिर आग उठी है,धुंआ उठा है,फिर शांत सभी हो जाना
    फिर धरना करना,दिए जलाना,फिर घर सभी चले जाना
    है गुजा़रिश तुम करो कल्पना, जो जुल्म हुए मासूम पर
    चीखें अगर तुम सुनना चाहो ,मंदिर की चौखट चले जान ।

    छोड ज़रा सी राजनीति को पिता से उसके मिल आना
    आँसू नही थमे है जिसके उस माँ को गले लगा आना
    वक्त मिले तो पिता से पूछो कितना मुश्किल है सह पाना
    जिसको उसने कंधे बिठाया उसकी अर्थी कंधे ले जाना।

    अब आवाज़ आसीफा दे नही सकती तुम आवाज़ उसकी बन जाना
    इस दुनिया से नाम हटेगा इन हैवानो का , ऐसा वादा कर आना
    अगर सरकारें शांत हो गई और मौन अगर अदालत ने थामा
    अब तक सिर्फ सरकार चुनी है,अब मौत चुनेंगे ये उन्हें कह आना।

    ©rishav_sharma