• nehulatagarg 6w

    बंटवारा हो रहा था आज घर में
    प्रसन्नचित्त थे सभी भाई आज इस पल में
    सबको अपने - अपने हिस्से का सब जो
    मिलने वाला था और खाली हाथ
    आज ना कोई रहने वाला था

    खुशी का पारावार नहीं था किसी का भी आज क्योंकि पिता सौंपने वाले थे अपनी सभी सौगात थोड़े से लडखडाते हुए माँ का सहारा लेकर आयें , घायल थे लेकिन फिर भी खुद
    को सम्हालनें की कोशिश में थे

    सबकी बांछे खिल उठी थी जब पिता ने बोलने के लिये मुंह खोला और सबके मन में इस
    उत्सव का उल्लासित उन्माद डोला

    बोलें पिता पीडा की गहरी सांस लेकर अपने
    छिन्न - भिन्न होते अरमानों के निश्वास लेकर
    मेरा है जो कुछ भी वो सबकुछ तुम्हारे लिये है लेकिन आज लग रहा वो तो केवल एक - एक के लिये है , निराश मैं ना तुम सबको करूंगा
    जैसे आज तक नहीं किया निराश मैने तुम्हें

    पहले भी हर एक चीज मैं तुम सबमें बांटता था हम दोनों के लिये बची है या नहीं यह सोचकर कभी ना उस चीज की तरफ झांकता था

    बंटवारे में तो सबकुछ बंटता है इसीलिये मैं भी बांटने आया हूँ लेकिन जो कुछ भी मैने अर्जित किया उसके पीछे मेरी लगन मेरी मेहनत थी
    तुम सबके प्रति मेरा प्रेम , कर्तव्यबोध और तुम सबकी प्रति मेरी जिम्मेदारी का भाव था

    बंटवारे में तो सबसे पहले मेरी यही पूंजी बंटेगी
    क्योंकि सिर्फ़ चीजों का अजर्न ही नहीं बल्कि उन चीजों को अर्जित करने के लिये किया गया परिश्रम भी सम्पत्ति कहलाता है

    तुम सब कह सकते हो की , यह तो माता - पिता होने का कर्तव्य था कोई उपकार नहीं तो यह बात तो तुम सब पर भी लागू होती है क्योंकि जिम्मेदारीयों की फेहरिस्त में तुम सबकी हमारे प्रति जिम्मेदारी भी गिनी जाती है

    Read More

    बंटवारा

    बंटवारा वो नहीं होता की , सम्पत्ति ही बंटती है बल्कि उस सम्पत्ति को बनाने में योगदान देने वाले की मेहनत भी बंटती है क्योंकि जब सब अपने - अपने हिस्से का परिश्रम करते है
    अजर्न के फल तभी मिलते है

    आज तुम सबके हिस्से में यह सब भी होगा तभी तो पूर्णरूप से बंटवारा वो कहलायेगा
    वो भूख भी बंटेगी जो तुम्हारी भूख मिटाने के लिये खुद को मिटा देती थी
    वो फाकें भी बंटेगे जो तुम सबकी जरूरतों के लिये हमने सहे थे और अपनी जरूरतों को हम तो जैसे भूल ही गये थे

    वो शिकायतें भी बंटेगी जो तुम सब हम दोनों
    से करते थे की , तुम्हारे पास वो चीज क्यों नहीं
    जो दूसरों के पास होती है
    वो दर्दों - गम भी बंटेगे जो तुम सबकी
    परवरिश करने में हम दोनों ने सहे थे और तुम
    सबके चेहरे पर मुस्कुराहटों को लाने के लिये
    हम सबकुछ सह गये थे

    वो धूप वो गर्मी की तपन वो सर्दी की ठिठूरन
    वो नंगे पैर चलना और पैदल ही पैसे बचाने के लिये दौड पडना और हर बार अपनी छोटी - छोटी ख्वाहिशों को तिलांजली देना ताकि तुम्हारी हर तमन्ना को हम पूरी कर पायें
    हर बार अपने आप पर पैसे खर्च करने से कतराना क्योंकि उन पैसों को तुम्हारे लिये
    जो रहता था हमें बचाना
    वो सोच वो ख्यालात जो तुम सबकी बेहतरी के लिये हमने सोचें थे और वो सब सपने भी जो तुम्हारे लिये हमने अपनी आँखों में तोड दिये थे

    तुम सबको दुनिया जहान की खुशीयां मिलें और वो सारी सुविधाऐं जो तुम सबको कभी अभावों को जानने का मौका ना दें पायें
    आज बंटवारा होगा तो इन सबका भी होगा पहले क्योंकि पहली पूंजी तो हमारी यही सब है
    हमारी सम्पत्ति तो पहले यही थी हमारे पास जो अजर्न कर पायी सब कुछ
    आओ आगे बढों पहले इन सबको स्वीकार करो तभी इस बंटवारे को पाने का अधिकार समझो
    अब घर में बिल्कुल शांति थी क्योंकि इस बंटवारे को पाने के वाला कोई घर में था ही नहीं