• aman_kaushik 6w

    नज़्म 6

    तुम ना होते तो कुछ भी ना होता
    ना दर्द होता, ना मोहब्बत
    अजीब सा रिश्ता है ना।
    तुम्हारा जाना अफ़सोस की बात है
    अगर रुकते तो बदनाम होता।
    इस तरह कौन खुश रहने की बद्दुआ दे जाता
    ये रंजिश, वो गुस्सा सब साज़िश थे
    दूर करने की अगर ध्यान से देखो।
    अच्छा है की मुझे ज्यादा गुस्सा नहीं आता
    और अब ना कभी मैं रूठता हूँ।

    मेरा आँखों के सामने होते भी चले जाना
    शायद तुम्हे अच्छा तो नहीं लगता होगा
    तुम्हारा पता नहीं, पर मुझे हरगिज़ नहीं।
    तरंग जो निकलती है
    तेरी यादों की बारात लेकर
    वो ख़त इसीलिए अब तक संभाल रखे
    पढ़ते पढ़ते नींद आ जाती है।
    फिर कभी कभी लगता है
    तुम ना होते तो कुछ भी ना होता।

    ©Aman kaushik