• gatisheel_sadhak_bihari 6w

    तेरे से दूर!

    तू पूछे जो मुझसे के तेरे कूचे से निकल के.......हम कहाँ जाएंगे,
    मैं तुच्छ सा इंसान बस वही जाऊं........किस्मत ले जहाँ जाएंगे!

    निकलो जो तुम..................मेरी तस्वीर पे अपनी नजरें फेरने,
    मैं तो दिखूंगा ही नहीं....क्योंकि फिर तेरी उपहास कहाँ जाएंगे!

    सुला लेना जज्बातों को........अपनी खामोशियों में ताउम्र पहर,
    वरना ख्यालात आहिस्ते-आहिस्ते,तेरी धड़कन ले जहाँ जाएंगे!

    रुसवा जो हुए कभी.........पाकर दर्द ए ज़ख्म मेरे कारनामों से,
    तुम होगी घायल तब हम बेचैन......खामोशियाँ ले जहाँ जाएंगे!

    शहर बुला रही है अपनी आगोश में लेने को...पर वहाँ तुम नहीं,
    पहर बुलाना गम ए जुदाई...........वरना यादें मेरी कहाँ जाएंगे!

    आना आहिस्ते जरा,यहाँ लोगों ने खुशियों पे लगा रखा पहरा है,
    मैं तो खुश हो लूंगा......पर उनकी गंदी नजरें फिर कहाँ जाएंगे!

    शुक्र है किसी ने आज तक कहा नहीं.......मुझे बदनाम साधक,
    गुमनाम ही रहो वरना...............यह इज्ज़त फिर कहाँ जाएंगे!
    ©gatisheel_sadhak_bihari