• kushagra_tewari 38w

    हाँ मै लिखता नहीं
    डर हो शायद पहचान से..
    पर जाना है अब , काश रोक पाता ये कहने से
    बड़ा अजीब हूँ ना खुद को ले कर ?
    हाँ , इसी लिए लिखता नहीं..

    याद है वो शाम ?
    बारिश से भीगे तुम्हारे बाल और मिट्टी की सौंधी महक वाली ?
    शायद वो बारिश थी , जिसे तुमने कहा था , "अभी ना जाओ छोड़ कर.." , पर तो मेरे ख़यालों को लग गए थे..
    ये नज़रिया भी गज़ब की चीज़ है ना ?
    इस लिए लिखता नहीं

    एक बात कौंधती है ज़हन मे , कि ज़रा मौन रहना बेहतर नहीं ?
    कहता हूँ , तो 'आघात' नाम देते हैं
    और ख़ामोशी पर सवाल भी हैं..
    हाँ , इस लिए लिखता नहीं

    उम्मीदों की आड़ मे , हसरतें तमाम हैं
    ज़रूरत और इश्क का अंतर चाहता हूँ ,
    हाँ , वो वक़त चाहता हूँ
    बस ये लिखता नहीं..



    ©kushagra_tewari