• arunendra 16w

    सुनो जानाँ

    सोते सपनों में जगते हर..... अनुभव में अस्तित्व तुम्हारा ...
    पाकर मैं एकत्व तुम्हीसे........... जीवन को दे सका सहारा...
    भले नहीं तुम पीपल सी हो........ भले बेर कह लो तुम खुद को....
    अमर-डाल हूँ, प्रिये ! बोलो..कैसे? इक पल भी तुमसे करूँ किनारा....
    ©AKM