• sujata_writes 13w

    शिव◆

    चहुँ ओर सन्नाटा था,वहीं कहीं किसी घर से रोने की आवाज़ सुनाई दे रही थी,सामने से मशाल जैसा कुछ आते दिखाई दे रहा था,अंजोर ने दस्तक दी थी। मशाल की रौशनी में धुँधली सी एक छाया दिखी जिसके आँखों से आँसुओं की झड़ी गाल को छूते हुए ज़मीन पर टपक रही थी।ज़मीन उसके हृदय की भाँति सर्द हो गयी थी,रक्त का प्रवाह थम गया था।श्मशान किनारें से आ रही ध्वनि उसके कानों को और अधिक तीव्र कर रही थी,जहां "शिव" स्वयं अपनी तीसरी आँखों को भींगोने का असफल प्रयास कर रहे थे।

    @sujata_writes