• phoenixresurrects 24w

    नज्म लिख कर कोई

    खुद एक नज्म हो जाता हूँ

    यादों को कहीं रख कर 

    मैं भुल जाता हूँ

    लम्हों में सातों आसमान

    घुम आता हूँ

    अंधेरों में एक रौशनी देख

    सुबह की नर्म धुप सा खिल जाता हूँ

    मंजिल है थोड़ी दूर 

    पर मिल रही नहीं राहों की खबर

    जींदगी ले जा रही जहाँ अभी

    बस उधर ही जा रहा हूँ

    एक अहसास उठ रहा जेहन में

    कि रुख मोड दुंगा इसका मैं

    पर समझ नहीं आ रहा कैसे

    कोशिशें  हजार की मैंने

    तन थक सा रहा है

    पर मन ये मेरा थमता नहीं


    ©phoenixresurrect