• anshika_sapehia15 15w

    धड़क

    दिल कैसे धड़कता है,
    यह पहली दफा तब पता चला,
    जब वो हवा के झोंको की तरह अपना एहसास दे गया,
    जब पहली बार उसके बढ़ते कदम मेरे किनारे से गुज़र गए,
    जब पहली दफा मुस्कुरा कर बात करने का इशारा मिला,
    जब हर मोड़ हर सपने में नोक झोंक करता दुबारा मिला।
    जब उसका पास में चुपके से आकर बैठ जाने का सलीका समझ आया,
    जब उसकी आँखों के इशारे से खफ़ा होने का तरीका समझ आया।
    जब उसका आके कुछ यूं ही बोल देना,
    और बैठे-बैठे अनकहे शब्दों में यूँ ही राज़ खोल देना।
    जब यूँ ही हाथ पकड़ अपने करीब खींच लेना,
    जब आँखों में आँखें डाल कर सपनों की दुनिया में ले जाना,
    जब अंजान बना आंसू दे जाना,
    और फिर उनके गिरने से पहले उन्हें चुरा ले जाना।
    दिल यूँ भी धकड़ता है,
    कभी सोचा न था।
    अब तो हर पल धड़कना होगा इसे
    क्योंकि, इसके रुकते ही
    तुम्हें खो देना मुझे मंजूर नहीं।

    ©अंशिका सपेहिया