• jaykijigyasa 22w

    स्कूल वाली अम्मा

     
    बुढ़िया की झोली में
    कुछ फल थे सूखे हुए,
    कुछ दबी हुई आकांक्षाएँ, 
    कुछ अनकहे रह गए शब्द।
    बुढ़िया के घर में अन्न न था,
    न कोई बिछौना,
    न कोई, किसी के होने की आवाज़।
    अपनी झोली बग़ल में रखे हुए
    बुढ़िया पसरी रहती है 
    ओसारे में 
    जैसे जीवन बिछा हो मृत्यु के फर्श पर।