• rolipoetry 3w

    कल आज और कल
    के चक्कर में कहीं बीता ना जाये ये पल।
    बेकार की है ये भगदड़।
    पिछे छूट जाऐगी ये कलकल।
    अगर बह गया जो है ये जलकल।
    ऊपर नीचे की हेर फेर में
    निकला जाये तेरा ये भी पल।
    लौट ले भाई छोड़ के झूठी
    मोह माया की ये हलचल।
    साथ ना जानी यंही रह जानी
    झूठी है ये दलबल।
    कल आज और कल....
    जीने में तो आयेगा बस ये पल, ये पल, ये पल।
    ��हरे कृष्णा ��
    ©rolipoetry

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    कल_आज_कल

    कल आज और कल
    के चक्कर में कहीं बीता ना जाये ये पल।
    बेकार की है ये भगदड़।
    पिछे छूट जाऐगी ये कलकल।
    अगर बह गया जो है ये जलकल।
    ऊपर नीचे की हेर फेर में
    निकला जाये तेरा ये भी पल।
    लौट ले भाई छोड़ के झूठी
    मोह माया की ये हलचल।
    साथ ना जानी यंही रह जानी
    झूठी है ये दलबल।
    कल आज और कल....
    जीने में तो आयेगा बस ये पल, ये पल, ये पल।
    ��हरे कृष्णा ��
    ©rolipoetry