• shaill 5w

    आगे बढ़ जाना है

    फिर हुई सुबह फिर उठ भीड़ में खो जाना है,
    ख्वाब भी बिछड़ गया शायद उसे कहीं जाना है।
    देखो कोई आज भटकेगा फिर उसे लौट के आना है,
    अपनी जगह पाने को फिर कईयों ने पसीना बहाना है।
    शाम होते ही मायूसी और आँसू का छलक जाना है,
    समझ लो ख़्वाब की तामीर को यह फ़क़त बहाना है।
    टूट कर गलती से भी उस दिशा में नही जाना है,
    जिंदगी को धुंए की धुन्द या गमे हलक में नहीं ले जाना है।
    आज खुद को इन गलियों से निकाल आगे बढ़ जाना है,
    जिंदगी में हर हार से सीख अपने कल को सँवारना है।
    शैल.....