• bscpoetry 5w

    झलक

    तेरी एक झलक मिल जाए,
    एस दिल को आराम आजाएं

    अब और कितनी धूप सहे यह जिस्म,
    थोड़ी बारिश तो‌ हो जाएं

    यह लू भला क्यूं चल रहीं हैं
    अब हम पर तरस खाए, ज़रा सा ठेहर जाएं

    लो दिन भी गुज़र गया अब क्या किया जाए,
    उम्मीदें ख़ामोश हुए ज़रा थक कर सो लिया जाएं

    दुआ करना जब तुम आओ तो‌ इतना प्यार बाक़ी हों,
    कि इस दिल से नाराज़गी भूल माफ़ी निकल जाएं

    वजाहो से मतलब ख़त्म सा हो गया हमारा,
    बस वक़्त से पहले एस रिश्ते का देहांत न हो जाएं

    कुछ कहने का मन नहीं न हीं देनी हैं कोई राए,
    रहते हैं हम आज‌ भी वहीं पर हीं कभी वक़्त मिलें तो मिलते जाएं।
    ©bscpoetry