• khusi_the_happiness 27w

    घी की बूंदें

    तुम खुलते ही नहीं
    खोई चाबी के बन्द ताले की तरह
    तुम घुलते ही नहीं मुझ में
    पानी पर बैठी चिकनी बूंद की तरह

    मैं पानी हूँ तो,तुम हो बूँद घी की
    हम दोनों की किस्मत, मिलती ही नही
    मैं तप जाऊं गर्म ताप से तो
    तुम पिघल के बिखर जाते हो हर कहीं
    मैं ठंड में लगने लागूं ठिठुरने तो
    जम जाते हो तुम भी वहीं

    न तुम देते हो मुझे गर्मी कोई
    न ही तुम देते हो नर्मी कोई
    बस बैठे हो मुझ में गुमसुम से यूँ ही
    बिन बातों के, थामे बीतते वक्त की सूई

    मेरी हर बात से, बदल जाते है रिश्ते हमारे
    मेरे हर जस्बात पे, टिके है महल ख्यालों के
    न तुम्हारी कोई ईंट है,जुड़े शब्दों की मिनारें
    न तुम्हारी कोई दीवार है, रोके तूफानों के थपेड़े
    इसलिए तुम्हारा छोड़ जाना,होता है आसान इतना

    मेरी तो दुनिया ही यही है तुम में
    देखती हूँ तुम्हें यूँ बेख़बर तैरते
    जानती हूँ तुम नही हो मेरे
    चले जाओगे एक दिन सवेरे
    थाम के हाथ अजनाबी के

    फिर भी बिताती हूँ तुम संग
    अपनी शामें और अपने सवेरे
    आशा में कि यादें सिमट जाए
    तुम्हारी मुझ में इतनी
    कि तुम्हारे जाने के बाद भी
    कुछ चिकनी बूंदे मुस्कुराए मुझ में
    रोशनी जब भी पड़े उन में वक्त की
    बन जाये दुनिया एक इंद्रधनुष सी
    रंगों भरी यादों की,
    चंचल सी अनेक बातों की

    पर खामोश है हम दोनों का सफर
    तुम कहते हो कि तुम हो यहीं मगर
    खामोशी से बीती जाए ये डगर
    न कोई याद है सुनहरी तुम्हारी
    न कोई जस्बात है मीठे से हमारे
    बस छाले है पैरों में दर्द भरे
    इस लम्बे सफर के

    काश ये छाले होते यादों के
    मेरे इस सुहाने सफर के
    मैं संजो लेती इन्हें भी
    अपनी खुशकिस्मती समझ के।

    ©khusi_the_happiness
    16 april 2018
    2.00 pm