• pravalranjan 6w

    हक़ीक़त

    हुक़ूमत-ए-इश्क़ के गिरफ़्त से , कोई आशिक़ न बचा..
    संगदिल तो जी गए..
    अहल-ए-दिल.....न जी सका , न मर सका....!!
    ©pravalranjan