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    #उम्मीद

    है अँधेरा घना पर रौशनी की उम्मीद तो है
    हारा हूँ कुछ बाजियां पर जीत की उम्मीद तो है
    रूठे हैं मेरे यार पर मान जाने की उम्मीद तो हैं
    खोये हुए प्यार को पाने की फिर से उम्मीद तो है
    दर्द कुछ ज्यादा है पर मुस्कुराने की उम्मीद तो है
    उलझी हुयी गिरहें खुल जाने की उम्मीद तो है
    भटका हुआ मुसाफिर हूँ पर मंजिल की उम्मीद तो है
    उम्मीद से ही जीवन है इसलिए उम्मीद तो है
    ©शैलेंद्र ©lucknowdreams