• neomallick 14w

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    स्याह मेरे हाथ में,पर ध्यान कहीं भटक रहा
    अशआर दिलऒजां के , खा गई है ज़िन्दगी
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    इश्क़ की ज्वाला अंतर्मन में, धधक रही थी
    तूफ़ां में जलता दीया,  बुझा गई है ज़िन्दगी
    ©neomallick