• shaktisuta 15w

    खो चुकी हूँ कहीं
    उलझनों की कश्ती लिए,
    कोई सुलझा कर पार करा दे......
    मेरी कल्पनाओं के आसमाँ के रंग
    कुछ बिखरे से लगने लगे है,
    कोई ज़मीं की फीकी फीकी छटाओं से
    मुलाक़ात करा दे......
    मेरे ख्वाबों का भँवर
    कहीं दूर उड़ा ना ले जाए मुझे,
    कोई मुझे मेरे ही सपनों के इस जहां से
    आज़ाद करा दे...❤

    Silent poetry
    ©shaktisuta