• parin_shah 7w

    तेज़ाब

    चाँद पर लगी जो तेज़ाब की मौहर,
    रह गयी ज़िंदा सह कर जौहर।
    उठी पार कर जलन का सागर,
    तब बने माता-पिता नगर के...
    तानों के जगर।।
    दागों से घिरी डरावनी सूरत,
    देती याद दुष्टों की फितरत,
    अश्रुओं में बहती टूटी हसरत,
    अब अंतरीय भय विरत,
    लगा जो मन...
    ऊँचाइयों को पाने में निरत।।
    न रुकूँगी मैं अब,
    बह गयी जो अड़चन बनकर रक्त।
    स्पष्ट है अब मन के मत,
    क्योंकि अब आएगी घड़ी...
    लेकर सुनहरे मौको से भरा वक्त।
    ©parin_shah