• nitikavats 14w

    माँ...

    वो रोती है, मुस्काती भी है,
    वो लोरी गाकर सुलाती भी है...
    वो डाटती है, सुनाती भी है,
    वो प्यार से मनाती भी है...
    वो लड़ती है,सताती भी है,
    वो गोद में बैठा जहां दिखाती भी है...
    वो नहलाती है, सहलाती भी है,
    खुद भूखी रह खिलाती भी है...
    वो चंचल है, थोड़ी नटखट भी,
    पर दिल से रिश्ता निभाती भी है...
    वो चुप रहती है, चिल्लाती भी है,
    वो अपना दर्द दफना हसाती भी है...
    वो सहती है, न कहती है,
    आंखों में कई राज छुपाती है...
    वो मां है, जहां है,
    वो ईश्वर का रूप कहलाती है
    ©nitikavats