• nehulatagarg 10w

    एक जन्नत - हमरूह

    बल्कि कन्हव तो उनके और ज्यादा करीब आते ही नहीं गये बल्कि एक तरह से उनकी चुनौतीयों से वो बेहतर होते ही चले गये और छौना हमेशा कहा करती थी कि , हम हमेशा सोचते है कि , दर्द तकलीफ और परेशानीयां हमारी जिंदगी में क्यों होती है ? जिंदगी में आने वाले उतार - चढाव हमें तोड़ने के लिये होते है जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है बल्कि यह सब चीजें तो हमें ना सिर्फ और बेहतर बनाती है बल्कि नये - नये रास्ते और नयी - नयी - नयी मंजिलें हमें दिखाती है और हमें खुद से ही नहीं मिलाती बल्कि हमारी क्षमताओँ और हमारे अन्दर के इंसान को भी हमसे मिलाती है और अगर दुनिया में अंधेरा नहीं होता तो क्या ? हम कभी उजालों की बात करते और तकलीफ नहीं होती तो खुशी की फरमाइश कभी करते और राहों में रोडें नहीं होते तो पहाड़ों का सीना कभी चीर पाते और जो हर युग में दुनिया इतनी आधुनिक होती जा रही है वो कभी हो पाती मतलब की सब कुछ दुनिया में दुख और परेशानीयों के बदौलत ही तो है नहीं तो दुनिया ही नहीं होती और ना ही इंसान ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति कहलाते कभी नहीं और वैसे भी देखा जायें तो इंसान सर्वश्रेष्ठ नहीं बल्कि सर्वश्रेष्ठ स्वार्थी प्राणी ज्यादा है ।