• kuldeep_singh 29w

    इस शहर की फ़िज़ा में यादो का उसका बशेरा है,
    हममे तो बस अब सिर्फ काला अँधेरा है,
    विश्वास नही होता हमे, विश्वास नही होता हमे
    उन्होंने हमे भी अपनी बाहों में समेटा है,
    इस रूह की तलाश में हमसे भी कितनो का दिल टुटा है-2
    शायद ये ही वो बददुआ थी जो हमसे अब इश्क भी रूठा है,
    रूठ जाये दुनिया हमसे, रूठ जाये दुनिया हमसे हमे कोई फर्क नही,
    वापिस आ जाये वो सकश अब, जिसने हमे अपनी बाहों में समेटा है।।
    ©kuldeep_singh