• ianubhav 13w

    अंधेरे की है अब जुस्तजू
    उजालो ने तो कबका साथ छोड़ दिया है।
    गमो से है अब गुफ्तगू
    खुशियों ने कबका मुह मोड़ लिया है।
    किस उम्मीद से मैं आरज़ू करू उस मोहब्बत को पाने की
    जहाँ मेरा साथ उम्मीदों ने उम्मीदों से ही तोड़ दिया है।
    ©ianubhav