• malhar_thakar 1w

    लापता

    खो चुका हूं कहीं आज तक खुद को न ढूंढ़ पाया,
    देख लो इन रगो में,उन यादों ने मुझे वहीं पे बसाया,
    हर जगह न है कोई पनाह,न कोई उम्मीद का साया,
    इस ज़िंदगी ने तो यह ज़हर मुझे दिल से पिलाया,
    ज़िंदगी को तो उनके नाम आजतक आजमाया,
    चलती इन हर घड़ियों में बस तन्हाई का शिकार बनाया,
    भटकते इस शक्स पर खुद ज़िंदगी ने भी मुस्कुराया,
    अधूरापन ही सही, इसी में मिली इस जन्नत को दिल ने खुल के मनाया,.......
    ©malhar_thakar